देहरादून के दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की बाधाएं होंगी दूर, 19 शैडो एरिया पर विशेष ध्यान

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देहरादून, विधानसभा चुनावों से पहले जनपद के सभी नेटवर्क विहीन और कमजोर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने दूरसंचार कंपनियों के अधिकारियों को आगामी आचार संहिता लागू होने से पूर्व सभी चिह्नित 19 शैडो एरिया में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के सख्त आदेश दिए हैं।

जनपद में कुल 19 ऐसे क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं है या बहुत कमजोर है। इनमें मसूरी विधानसभा क्षेत्र के 7 और चकराता विधानसभा क्षेत्र के 12 क्षेत्र शामिल हैं। यदि इन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क स्थापित करने में राजस्व या वन भूमि संबंधी कोई समस्या आती है, तो संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाएगा ताकि कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के कार्य में अनावश्यक देरी न हो।

निष्क्रिय मोबाइल टावर होंगे दुरुस्त

जिलाधिकारी ने सभी मोबाइल कंपनियों को अपने टावरों और नेटवर्क कनेक्टिविटी का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो मोबाइल टावर वर्तमान में क्रियाशील नहीं हैं, उन्हें तत्काल दुरुस्त कर नेटवर्क सेवा बहाल की जाए। जिन क्षेत्रों में किसी भी दूरसंचार कंपनी का मोबाइल टावर उपलब्ध नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर बीएसएनएल अपने टावर स्थापित करने की कार्ययोजना पर तेजी से काम करेगा। साथ ही, ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों तक भारतनेट परियोजना के अंतर्गत फाइबर नेटवर्क कनेक्टिविटी का कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

बीएसएनएल के 170 गांव अभी भी नेटवर्क से वंचित

बैठक में बीएसएनएल के अधिकारियों ने बताया कि जनपद के कुल 767 गांवों में से 597 गांवों में कनेक्टिविटी उपलब्ध करा दी गई है, जबकि 170 गांव अभी भी नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं। कुंआवाला से लच्छीवाला, दांडी से ऋषिकेश, रायवाला से हरिपुरकलां और दौड़वाला से दूधली तक के वन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में कठिनाइयां आ रही हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि फुलसानी, दिरनाद और सिल्ला में नए 4जी मोबाइल टावर स्थापित करने के प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। पूर्व में 4जी मोबाइल टावर सेचुरेशन परियोजना के तहत 24 ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 22 में कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। रायपुर और सहसपुर क्षेत्र की एक-एक ग्राम पंचायत में वन भूमि संबंधी समस्या के कारण कार्य लंबित है।

भारतनेट परियोजना के तहत कनेक्टिविटी कार्यों में तेजी

भारतनेट परियोजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि प्रथम चरण में 209 ग्राम पंचायतों को जोड़ा गया था, लेकिन फाइबर केबल कटने के कारण वर्तमान में 69 ग्राम पंचायतों में कनेक्टिविटी प्रभावित है। परियोजना के द्वितीय चरण में 228 ग्राम पंचायतों में से 189 को जोड़ा जा चुका है, जबकि शेष 39 ग्राम पंचायतों में कार्य प्रगति पर है। जिलाधिकारी ने प्रभावित ग्राम पंचायतों में नेटवर्क बहाली और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और वन क्षेत्रों में संचार सुविधाओं का विस्तार प्रशासन की प्राथमिकताओं में है और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से निर्धारित समयसीमा में लक्ष्य हासिल करें।