चीन ने भारतीय कारोबारियों के लिए कड़े किए वीजा नियम, इलेक्ट्रॉनिक्स-ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर

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नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच कारोबारी गतिविधियों को सामान्य करने की कोशिशों के बीच भारतीय कंपनियों के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। चीन जाने वाले भारतीय कारोबारियों, अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए बिजनेस वीजा हासिल करना पहले के मुकाबले काफी कठिन हो गया है। हाल के महीनों में वीजा आवेदनों की मंजूरी में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

कुछ कंपनियों में 95 प्रतिशत तक आवेदन खारिज होने का दावा

रिपोर्टों के मुताबिक, पहले जहां भारतीय कंपनियों के अधिकारियों के बिजनेस वीजा आमतौर पर आसानी से मंजूर हो जाते थे, वहीं अब कुछ कंपनियों के केवल 20 से 40 प्रतिशत आवेदन ही स्वीकृत हो रहे हैं। कुछ मामलों में वीजा आवेदन खारिज होने की दर 95 प्रतिशत तक पहुंचने की बात भी सामने आई है। दोबारा आवेदन करने पर भी मंजूरी मिलने की गारंटी नहीं है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों की बढ़ी परेशानी

चीन के इस सख्त रुख का सबसे ज्यादा असर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी भारतीय कंपनियों पर पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में मशीनरी, उपकरण, पुर्जों और तकनीकी सहयोग के लिए चीन पर काफी निर्भरता है। कुछ उद्योगों में चीन से आने वाले कंपोनेंट और पूंजीगत सामान की हिस्सेदारी काफी अधिक है।

कंपनियों के अधिकारियों और इंजीनियरों को आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, मशीनरी की खरीद, तकनीकी समस्याओं के समाधान और व्यावसायिक समझौतों के लिए चीन जाना पड़ता है। ऐसे में वीजा मिलने में देरी या आवेदन खारिज होने से परियोजनाओं और कारोबारी गतिविधियों पर सीधा असर पड़ रहा है।

चीन की जगह दूसरे देशों में करनी पड़ रही बैठकें

वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण कई भारतीय और चीनी कंपनियों को अपनी महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठकें चीन से बाहर स्थानांतरित करनी पड़ रही हैं। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और हांगकांग जैसे स्थान ऐसी बैठकों के विकल्प बन रहे हैं।

भारतीय कंपनियों के अधिकारियों के लिए चीन की यात्रा मुश्किल होने के कारण कंपनियां अपने चीनी साझेदारों के साथ बैठक के लिए दूसरे देशों का सहारा ले रही हैं। इससे कंपनियों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहा है।

रोबोटिक्स और एआई स्टार्टअप भी प्रभावित

इसका असर केवल पारंपरिक विनिर्माण कंपनियों तक सीमित नहीं है। भारत के रोबोटिक्स, हार्डवेयर और फिजिकल एआई से जुड़े स्टार्टअप भी प्रभावित हो रहे हैं। इन कंपनियों के अधिकारियों को सप्लाई चेन पार्टनरों से मिलने, हार्डवेयर सोर्सिंग और नई तकनीकों की जानकारी के लिए चीन की यात्रा करनी पड़ती है।

भारत-चीन व्यापारिक रिश्तों के लिए नई चुनौती

यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। यदि वीजा संबंधी बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसका असर भारतीय कंपनियों की सप्लाई चेन, तकनीकी सहयोग और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ सकता है।


स्रोत:

अमर उजाला