चारधाम यात्रा पर प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच संकल्पों के पालन का किया आग्रह

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देहरादून: चारधाम यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों के लिए शुभकामना संदेश जारी किया है। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उन्होंने उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों से यात्रा के दौरान पांच विशिष्ट संकल्पों को अपनाने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि चारों धामों की यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण उत्सव है। उन्होंने आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य जैसे महापुरुषों के इन धामों से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए इसे शाश्वत आस्था का केंद्र बताया।

प्रधानमंत्री ने संदेश में कहा कि विकसित भारत के निर्माण में उत्तराखंड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति के क्षेत्रों में राज्य के बढ़ते कदमों की चर्चा की। तीर्थयात्रियों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास का पालन करें, ताकि वे तकनीक से दूर रहकर प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकें। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया गया है जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।

स्वच्छता को सर्वोपरि बताते हुए पहले संकल्प के रूप में धामों और नदियों के आसपास सफाई बनाए रखने का आह्वान किया गया है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें और पर्यावरण की गरिमा बनाए रखें। दूसरे संकल्प के अंतर्गत प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बरतने और पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण जैसे प्रयासों में योगदान देने की बात कही गई है।

तीसरे संकल्प में सेवा और सहयोग पर बल दिया गया है। तीर्थयात्रियों को अपने सहयात्रियों की सहायता करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया है। चौथे संकल्प के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने का आग्रह किया गया है। इसके तहत तीर्थयात्रियों से अपनी यात्रा के कुल खर्च का कम से कम पांच प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादों की खरीद पर व्यय करने को कहा गया है, ताकि स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिल सके।

पांचवें संकल्प के रूप में अनुशासन और नियमों के पालन की अपील की गई है। यात्रियों को यातायात निर्देशों का पालन करने और यात्रा प्रबंधन में लगे कर्मियों को सहयोग करने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से भी आग्रह किया है कि वे उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और छोटी-छोटी परंपराओं को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें।

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